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होम >> कोर्पोरेट बैंकिंग >> टेक्नोलोजी अपग्रेडेशन निधि योजनाएँ  (टीयूएफ योजनाएं)
 
 

हमारे बैंक को निम्नांकित योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए "नोडल एजेन्सी " के रूप में नियुक्त किया गया है :

    1. वॉा मंत्रालय की टेक्नोलोजी अपग्रेडेशन निधि योजना (टीयुएफस) ।
    2. सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमओएमएसएमई) के लघु व मध्यम उद्यमों के टेक्नोलोजी स्तरोन्न्यन (अपग्रेडेशन) हेतु ऋण संबद्ध आर्थिक सहायता योजना  (सीएलसीएसएस)।
    3. खाद्य प्रसंसाधन उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई)  के खाद्य प्रसंसाधन उद्योगों की टेक्नोलोजी अपग्रेडेशन  की योजना—
    4. उपभोक्ता  कार्य, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्रालय (एसईएफएएसयू) के चीनी उपक्रम 2007 को सहायता प्रदान करने की योजना ।

I) टीयूएफएस :  यह योजना 31.03.2012 तक जारी मेंहै ।

योजना का विस्तार : यह योजना मौजूदा इकाइयों के आधुनिकीकरण/विस्तरण के साथ-साथ वॉा व जूट उद्योग में न्यून+तम मानदंड स्तर (बेंचमार्क) टेक्नोलोजी वाली नई इकाइयों को लगाने  के लिए उपलब्ध है ।

प्रावरित कार्यकलाप :

  • रुई ओटना और प्रेस करना, वॉा उद्योग-रेशम रीलिंग, ऊन साफ करना, सिंथेटिक फिलमेन्ट रेशा उत्पादन, कातना, बुनना, सलाई, वॉा पर एम्ब्रोयिडरी, कपड़े से पोशाक निर्माण, प्रोसंसिंग, डायिंग आदि ।
  • पटसन उद्योग

वॉा उद्योग के लिए टेक्नोलोजी अपग्रेडेशन निधि में निम्नांकित चार योजनाएँ शामिल होंगी :

1.  योजना के अनुरूप टेक्नोलजी अपग्रेडेशन की परियोजना पर प्रभारित ब्याज पर पाँच प्रतिशत की प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराना जहां योजना केधकार्यान्वयन सहित अधिकतम अवधि दस वर्षों के लिए होगी और अधिस्थगन अवधि अधिकतम 2 वर्षों तक के लिए होगी ।  तथापि, कताई मशीनरी के लिए प्रतिपूर्ति केवल चार प्रतिशत हागी .

2.  लघु उद्योग वॉा  व जूट क्षेत्र के लिए टीयूएफ  अनुकूल निर्दिष्ट मशीनरी में निवेश के लिए 5% ब्याज प्रतिपूर्ति के बदले 15% मार्जिन राशि आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी जहां अधिकतम पूँजी रु.200 लाख होगी और अधिकतम आर्थिक सहायता की मार्जिन राशि रु.15 लाख होगी।  लाभार्थियों से न्यूनतम 15% न्यायसंगत अंशदान सुनिश्चित किया जायेगा । 

3.  योजना के तहत तकनीकी वॉााटं के निर्माण व वॉा निर्माण मशीनरियों के लिए अपेक्षत निर्दिष्ट प्रोसेसिंग मशीनी व निर्दिष्ट मशीनरी  के लिए अतिरिक्त 10% की पूँजी आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी । 

4.  योजना के तहत पावर लूम इकाइयें के लिए टीयूएफ  अनुकूल निर्दिष्ट मशीनरी में निवेश के लिए  5% ब्याज प्रतिपूर्ति के बदले 20% मार्जिन राशि आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी जहां अधिकतम पूँजी रु.200 लाख होगी और अधिकतम आर्थिक सहायता की मार्जिन राशि रु.20 लाख होगी।

यह योजना सीधे आयुक्त, वॉा मंत्रालय के कायालय, मुंबई से  कार्यान्वित का जाती है ।

II) एमओएमएसएमई योजना की ऋण संबद्ध पूँजी आर्थिक सहायता योजना (सीएलसीएसएस) दिनांक 31.03.2012 तक लागू रहेगी । 

उद्धेश्य :  इस योजना का उद्देश्य योजना के तहत अनुमोदित निर्दिष्ट उप-क्षेत्र /उत्पादों में भली-भांति स्थापित व सुधारित टेक्नोलजी के अधिष्ठापन के लिए लिये गये संस्थागत वित्त पर लघु खादी गाँव व कयर उद्योग इकाइयों सहित सूक्ष्म लघु व मध्यम उद्यमियों को 15% अपप्रं€ट पूँजी आर्थिक सहायता की राशि उपलब्ध कराते हुए तकनीकी उन्नयन (अपग्रेडेशन) सुसाध्य बनाना है ।

III) खाद्य प्रसंस्करण उद्याग मंत्रालय (एमओएफपीआई) के खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए टेक्नोलोजी अपग्रेडेशन की प्लान योजना

योजना का लाभ व उसकी व्याप्ति :

  • देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए बल देने  और व्यापक कवरेज प्रदान करने हेतु ।
  • फल, सब्जी, दुग्ध उत्पाद, मुर्गी मांस, फ्लोअर मिल, चावल  मिल, तिलहन उत्पाद और सुगंध, रंग एवं मसाला आदि सहित ऐसे अन्य कृषि-बागबानी क्षेत्र इस योजना में प्रावरित हैं ।  
  • एरिएटेड जल, सॉफ्ट ड्रिंक, पैकेज किये गये पेय-जल इस योजना के अधीन सहायता हेतु अर्ह नहीं है ।
  • महिलाओं तथा अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातियों की श्रेणी को प्राथमिकता दी जाए ।
  • योजना के अधीन सहायता एवं पात्रता :
  • केवल  नये खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र व मशीनरी पात्र हैं ।
  • संयंत्र वं मशीनरी एवं तकनीकी सिविल कार्य की लागत  का 25%, जिसमें साथ सामान्य क्षेत्रों में अनुदान की अधिकतम राशि रु .50 लाख है ।
  • जम्मु-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम एवं उत्तर-पूर्वी राज्य, अंडमान व निकोबार द्वीप समूह व आईटीडीपी (एकीकृत जनजाति विकास परियोजना) क्षेत्रों में 33%, जिसकी अधिकतम राशि रु.75 लाख है ।
  • तकनीकी सिविल कार्य में दफ्तर की इमारतें, अतिथि-गृह , कैन्टीन एवं सड़कें शामिल नहीं हैं ।
  • वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने के पहले यूनिट को आवेदन करना चाहिए ।
  • व्यक्ति, फर्म, सहकारी संस्था, कंपनियाँ एवं सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम पात्र हैं ।
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